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भारत मंथन 2025 : राष्ट्रीय जागरण के संकल्प के साथ दो दिवसीय आयोजन सफलता पूर्वक संपन्न

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित रामजस महाविद्यालय के सभागार में आयोजित दो दिवसीय ‘भारत मंथन 2025’ कार्यक्रम का भव्य समापन राष्ट्रीय जागरण के उत्साह के साथ हुआ। इस वैचारिक संगोष्ठी में अनेक विशिष्ट अतिथियों, शिक्षाविदों, और वरिष्ठ स्वयंसेवकों ने भाग लेकर युवाओं को राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दूसरे दिन विभिन्न संवाद सत्रों में आमंत्रित विशिष्ट अतिथियों — श्री लक्ष्मीनारायण भाला जी, डॉ. किस्मत कुमार और श्री अजेय जी ने 60, 70 और 80 के दशक के अपने अनुभव साझा करते हुए नई पीढ़ी के स्वयंसेवकों को समृद्ध किया। उन्होंने राष्ट्रीय चेतना, समाज सेवा और संगठन के महत्व पर जोर देते हुए अपने प्रेरणादायक संस्मरण सुनाए।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता श्री अनिल गुप्ता (प्रांत कार्यवाह, दिल्ली, रा.स्व.संघ) ने कहा कि “इतिहास ने झूठी कहानियों से हिन्दू समाज को छला है, जिसे डॉ. हेडगेवार जी ने तोड़ने का कार्य प्रारंभ किया। उनके प्रयासों से हिन्दू जागरण का जो पौधा लगा, वह आज वटवृक्ष बन चुका है।” उन्होंने वर्तमान समय में संगठन की प्रासंगिकता पर बल दिया।

‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक का सैद्धांतिक अधिष्ठान’ विषय पर आयोजित वैचारिक मंथन सत्र का समापन श्री तरुण गर्ग के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य वक्ताओं, विशिष्ट अतिथियों, वरिष्ठ स्वयंसेवकों, आयोजकों और उपस्थित दर्शकों का आभार प्रकट किया।

समापन सत्र में विशिष्ट अतिथि प्रो. सत प्रकाश बंसल (कुलपति, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय) ने अंतरराष्ट्रीय अनुभव साझा करते हुए कहा कि “जैसे ही भारत ने ‘इंडिया’ से ‘भारत’ की ओर वापसी की है, विश्व भारत को नई दृष्टि से देखने लगा है।”

समापन सत्र के अध्यक्ष प्रो. योगेश सिंह (कुलपति, डीयू) ने संघ के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि “संघ व्यक्ति के मन, बुद्धि और ज्ञान का परिष्कार करता है तथा बचपन से ही संस्कारों के बीज डालकर राष्ट्र निर्माण की दिशा में कार्य करता है।”

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री मुकुल कानिटकर (सदस्य, अखिल भारतीय प्रचार टोली, रा.स्व.संघ) ने कहा, “हिन्दू समाज को संगठित करना ही संघ का उद्देश्य है। यह कार्य अत्यंत कठिन है जिसे अनगिनत साधकों ने तपस्या से संभव बनाया है।” उन्होंने आगे कहा कि “व्यवस्था परिवर्तन के लिए तंत्र परिवर्तन आवश्यक है और तंत्र परिवर्तन के लिए विचार परिवर्तन जरूरी है। संघ इसी विचार परिवर्तन की धारा है।”

कार्यक्रम के अंत में प्रो. गीता भट्ट (निदेशक, NCWEB) ने सभी सहयोगी संस्थाओं, कार्यकर्ताओं, अतिथियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों को सफल आयोजन के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

यह दो दिवसीय आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य की दिशा तय करने वाला विचार मंच बना, जिसने प्रतिभागियों को वैचारिक दृढ़ता और प्रेरणा से भर दिया।

जमुई से संतोष

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