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स्वतंत्रता दिवस पर अंचलाधिकारी पद से इस्तीफा देकर समाजसेवा की राह पर अग्रसर हुए नेचर विलेज के संरक्षक निर्भय प्रताप, प्रशासनिक हस्तक्षेप से तिरंगा यात्रा रोकने पर जताया आक्रोश

जमुई, 15 अगस्त 2025 — स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जहाँ पूरे देश में राष्ट्रभक्ति की भावना चरम पर थी, वहीं बिहार के जमुई ज़िले में एक अप्रत्याशित प्रशासनिक घटनाक्रम देखने को मिला। जमुई सदर अंचलाधिकारी और नेचर विलेज मटिया के संरक्षक निर्भय प्रताप ने 15 अगस्त को अपने पद से इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया। इस फैसले के पीछे का कारण उनके अनुसार प्रशासन द्वारा तिरंगा यात्रा को रोके जाने का कड़ा विरोध था, जिससे वे गहरे रूप से आहत हुए।

तिरंगा यात्रा से विवाद की शुरुआत

12 अगस्त 2025 को निर्भय प्रताप ने नेचर विलेज मटिया से लेकर जमुई मुख्यालय तक एक तिरंगा यात्रा आयोजित की थी। इस यात्रा का उद्देश्य था जनमानस में देशभक्ति की भावना को जागृत करना और पर्यावरण तथा स्वदेशी मूल्यों के प्रति जागरूकता फैलाना। उन्होंने प्रशासन से पूर्व में अनुमति प्राप्त की थी, और यात्रा की तैयारियाँ भी बड़े स्तर पर की गई थीं।

यात्रा की शुरुआत जोश के साथ हुई थी और इसमें सैकड़ों युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, ग्रामीणों और स्कूली बच्चों ने भाग लिया। लेकिन जैसे ही यात्रा शहर की सीमा में प्रवेश करने लगी, प्रशासन ने अचानक से इसे रोक दिया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों और यातायात अवरोध का हवाला देते हुए यात्रा को आगे बढ़ने से रोक दिया।

“यह सिर्फ यात्रा नहीं, विचारों की अभिव्यक्ति थी” — निर्भय प्रताप

इस घटना से निर्भय प्रताप अत्यंत विक्षुब्ध हो गए। उन्होंने इसे केवल एक यात्रा नहीं बल्कि विचारों की अभिव्यक्ति और जन भावनाओं का सम्मान बताया। उन्होंने कहा, “जब एक शांतिपूर्ण तिरंगा यात्रा, जिसकी अनुमति पहले से ली गई थी, उसे रोका जाता है, तो यह केवल मेरे साथ नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ अन्याय है।”

14 अगस्त को की प्रेस वार्ता, 15 अगस्त को दिया इस्तीफा

इस घटनाक्रम के बाद 14 अगस्त को निर्भय प्रताप ने एक प्रेस वार्ता आयोजित की जिसमें उन्होंने प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए और अपनी पीड़ा सार्वजनिक की। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वे संवेदनशील प्रशासन के पक्षधर हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में वे स्वयं को बंधा हुआ महसूस कर रहे हैं।

प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि यदि एक प्रशासनिक अधिकारी होने के बावजूद वे आम जनता के मूलभूत अधिकारों की रक्षा नहीं कर सकते, तो उस पद पर बने रहना नैतिक रूप से उचित नहीं है।

इसके ठीक अगले दिन, 15 अगस्त 2025 को, उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा वरीय अधिकारियों को भेजते हुए यह स्पष्ट किया कि अब वे पूर्ण रूप से समाज सेवा को समर्पित होना चाहते हैं।

“जनता की सेवा ही मेरा संकल्प” — समाजसेवा का संकल्प

इस्तीफा देने के बाद निर्भय प्रताप ने नेचर विलेज में एक छोटी सभा को संबोधित किया, जहाँ उन्होंने कहा:

> “मैंने पद त्यागा है, जिम्मेदारी नहीं। मैं अब प्रशासनिक मर्यादाओं से बंधा नहीं हूँ और पूरी स्वतंत्रता से समाज के हर वर्ग तक पहुँचने का प्रयास करूँगा। मैं जमुई विधानसभा क्षेत्र में रहकर, जनता के हर दुख-दर्द में उनके साथ खड़ा रहूँगा।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य राजनीति नहीं, जनसेवा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और युवाओं के सशक्तिकरण पर वे विशेष रूप से काम करेंगे।

नेचर विलेज: एक मिशन, एक आंदोलन

निर्भय प्रताप पिछले कुछ वर्षों से नेचर विलेज, मटिया के माध्यम से समाज में प्राकृतिक जीवनशैली, जैविक खेती, और आत्मनिर्भरता की भावना को बढ़ावा दे रहे हैं। यह परियोजना अब एक आंदोलन का रूप ले चुकी है, जिसमें बड़ी संख्या में युवा और ग्रामीण जुड़ चुके हैं।

उनका मानना है कि देश की आत्मा गाँवों में बसती है, और जब तक गाँव सशक्त नहीं होंगे, तब तक देश वास्तव में स्वतंत्र नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नेचर विलेज को अब एक जनसहभागिता मॉडल के तहत और अधिक विस्तार दिया जाएगा।

जनता का समर्थन

निर्भय प्रताप के इस कदम को जनता से विशाल समर्थन मिला है। उनके इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें समर्थन देने वालों की बाढ़ आ गई। कई युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और किसानों ने उनके साथ काम करने की इच्छा जताई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्भय प्रताप जैसे अधिकारी बिरले ही होते हैं जो प्रशासनिक दायरे में रहते हुए भी जनहित को प्राथमिकता देते हैं। अब जब उन्होंने खुलकर समाजसेवा की राह चुनी है, तो उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वालों की कमी नहीं होगी।

निष्कर्ष

निर्भय प्रताप का इस्तीफा केवल एक व्यक्ति का निर्णय नहीं, बल्कि यह एक सिद्धांत और मूल्य आधारित सोच का प्रतीक है। यह घटना बताती है कि आज भी ऐसे लोग हैं जो सत्ता और पद के मोह से ऊपर उठकर समाज की भलाई के लिए काम करना चाहते हैं।

स्वतंत्रता दिवस पर यह कदम यह भी संकेत देता है कि भारत का भविष्य केवल राजनीतिक गलियारों में नहीं, बल्कि उन सजग और संवेदनशील नागरिकों के हाथों में है, जो परिवर्तन लाने का साहस रखते हैं।

निर्भय प्रताप अब केवल नेचर विलेज के संरक्षक नहीं, बल्कि नई सोच और नवचेतना के वाहक बन चुके हैं। आने वाले समय में वे किस रूप में जनता के बीच अपनी भूमिका निभाएंगे, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन फिलहाल, उन्होंने यह साबित कर दिया है कि सच्ची देशभक्ति पद नहीं, सेवा में निहित है।

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