श्रेयसी सिंह कौन हैं — परिचय
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पारिवारिक पृष्ठभूमि
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श्रेयसी सिंह बिहार के जमुई जिले के गिद्धौर 출身 हैं
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उनका परिवार राजनीतिज्ञों और शस्त्रबाज़ी (शूटिंग) से जुड़ा रहा है: उनके पिता दिग्विजय सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री थे, और उनकी मां पुतुल कुमारी भी सांसद रह चुकी हैं।
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उनकी दादा, कुमार सुरेन्द्र सिंह, ने National Rifle Association of India में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी — यानी शूटिंग उनकी विरासत का हिस्सा रही है।
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शिक्षा
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श्रेयसी ने एमबीए किया है।
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उनकी संपत्ति-स्थिति भी सार्वजनिक रूप से दर्ज है — उनके हलफनामे में उनकी संपत्ति और आय का विवरण सामने आया है।
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खेल-करियर (शूटिंग)
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श्रेयसी सिंह अपनी शूटिंग करियर में बहुत सफल रही हैं, खासतौर पर डबल ट्रैप इवेंट में।
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उन्होंने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स (Gold Coast) में स्वर्ण पदक जीता था।
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इसके पहले, उन्होंने 2014 Glasgow कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत भी जीता था।
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एशियाई खेलों में भी उनकी भागीदारी रही है — उदाहरण के लिए, 2014 एशियन गेम्स में टीम इवेंट में ब्रॉन्ज पदक।
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उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है, जो खेल में उत्कृष्टता का बड़ा सम्मान है।
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उन्होंने अपने करियर में राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रदर्शन किया है — वे नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। P
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ओलिंपिक्स: श्रेयसी सिंह ने 2024 पेरिस ओलिंपिक्स में हिस्सा लिया।
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हाल ही में उन्होंने राष्ट्रीय खेलों (National Games) में भी हिस्सा लिया है, जहां उनका लक्ष्य बिहार के लिए पदक जीतना था।
राजनीतिक करियर
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राजनीति में एंट्री
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उन्होंने 2020 में भाजपा (BJP) का दामन थामा।
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उसी साल, वे जमुई विधानसभा सीट से चुनाव जीतीं — यह उनका पहला चुनाव था।
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विधायक के रूप में
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वे जमुई (Jamui) विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं।
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2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने शानदार जीत दर्ज की — RJD के मोहम्मद शमशाद आलम को करीब 54,498 वोटों से हराया।
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मंत्री पद
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20 नवंबर, 2025 को श्रेयसी सिंह को नीतीश कुमार की नई बिहार कैबिनेट में मंत्री बनाया गया।
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें खेल और युवा कल्याण जैसे क्षेत्रों में मंत्रालय की जिम्मेदारी मिल सकती है, क्योंकि उनकी खेल पृष्ठभूमि और लोकप्रियता इस क्षेत्र में उपयुक्त दिखती है।
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उनका कैबिनेट में नामांकन यह दिखाता है कि उनकी बढ़ती राजनीतिक प्रतिष्ठा है और उन्हें भविष्य में बिहार में एक मजबूत युवा नेता माना जा रहा है।
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उनकी विशेष पहचान — “गोल्डन गर्ल”
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गोल्डन गर्ल का टैग उन्होंने अपनी खेल-उपलब्धियों (विशेषकर कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड) की वजह से पाया है।
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इससे भी बड़ी बात यह है कि उन्होंने खेल में अपनी सफलता को राजनीति के क्षेत्र में अच्छे से ट्रांसलेट किया — यह कम ही लोग कर पाते हैं।
चुनौतियाँ और महत्व
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श्रेयसी सिंह के लिए चुनौती यह होगी कि वे खेल और राजनीति के बीच संतुलन बनाए रखें — दोनों में योगदान देना आसान नहीं है।
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उनकी पृष्ठभूमि (राजनीति + खेल) और युवा-उत्साह उन्हें बिहार की नई पीढ़ी के नेताओं में एक मजबूत चेहरा बनाती है।
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उनके मंत्री बनने से यह उम्मीद की जा रही है कि वे युवा, खेल-कल्याण और महिलाओं के मुद्दों पर ध्यान देंगी, और बिहार में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करेंगी।REPORTED BY SANTOSH

